सनातन में कुप्रथाएं? एक सफेद झूठ!
मेरी प्रथम पुस्तक, जिसमें वामपंथी इतिहासकारों द्वारा रचित उन सभी षड्यंत्रों का वर्णन किया गया है, जिनके माध्यम से भारतीय महिलाओं को शोषित दर्शाने का प्रयास किया गया था जिससे सनातन धर्म को बदनाम करने का उनका उद्देश्य सार्थक हो जाए।
साथ ही विदेशी आक्रान्ताओं द्वारा भारतीय इतिहास के साथ कैसे छेड़छाड़ की गई तथा शब्दों के साथ कैसे फेर-बदल किया गया, वह भी इस पुस्तक में विस्तृत रूप से प्रस्तुत किया गया है।
साथ ही इस पुस्तक में सनातन धर्म को बदनाम करने के उद्देश्य से वामपंथी मीडिया द्वारा इन प्रथाओं का प्रचार प्रसार कैसे किया गया यह भी बताया गया है।
अतः यह पुस्तक भारतीय संस्कृति में स्थित उन सभी कुप्रथाओं को सिरे से खारिज करती है जिन्हें वामपंथी इतिहासकारों द्वारा बताया गया था। साथ ही यह समृद्ध भारतीय संस्कृति की सभ्यता को भी दर्शाती है जहाँ प्रत्येक स्त्री का सम्मान किया जाता था और सम्मान किया था जाता रहेगा।
कृपया इस पुस्तक को अपना प्रेम दें और अवश्य पढ़ें!
“वह देवियों सी सम्मानित थीं, परंतु अपमानित नहीं।
वह रत्नों सी शोभित थीं, परंतु शोषित नहीं।
ये तो अंग्रेजों का षड्यंत्र समझो, जिन्होंने स्त्री को कमजोर बनाया!
नहीं तो भारतीय स्त्री भी दुर्गा का रूप थीं, जो किसी से कम नहीं।”
-- कृष्णांश --
जय श्री राम
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